शैख़ की दावत में मय का काम क्या एहतियातन कुछ मँगा ली जाएगी

“What place has wine at the banquet of the Sheikh? / Still, just as a precaution, a little shall be sent for.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

शैख़ की दावत में शराब का क्या काम है? फिर भी सावधानी के तौर पर थोड़ी सी मँगवा ली जाएगी।

विस्तार

यह शेर उर्दू शायरी के मशहूर किरदार 'शैख़' पर बेहद खूबसूरत और चुटीला तंज़ है। ज़ाहिर तौर पर शैख़ साहब ज़ाहिद और परहेज़गार हैं, इसलिए उनकी महफ़िल में शराब का क्या काम! लेकिन दूसरे ही मिसरे में शायर 'एहतियातन' शराब मँगाने की बात कहकर मुस्कुराते हुए उनके दिखावे की पोल खोल देता है कि बंद कमरों में असलियत कुछ और ही हो सकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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