किस मर्तबा थी हसरत-ए-दीदार मिरे साथ
जो फूल मिरी ख़ाक से निकला निगराँ था
“What status was the longing for your sight with me? / The flower that sprouted from my ashes was watchful.”
— میر تقی میر
معنی
میرے ساتھ دیدار کی چاہت کس مرتبہ تھی، کہ جو پھول میری خاک سے نکلا وہ نگراں تھا۔
تشریح
यह शेर मोहब्बत की गहराई को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि मेरा दीदार करने की ये चाहत किस मर्तबे की थी? यह कहते हैं कि तेरा प्यार तो ऐसा है, जैसे कोई फूल मेरी ही राख से निकलकर, मुझ पर निगराँ हो।
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