मुँह लगाया न दुख़्तर-ए-रज़ को
मैं जवानी में पारसाई की
“I did not apply my face to the sorrow of Razzaq; I found separation in my youth.”
— میر تقی میر
معنی
میں نے دکھترِ رَز کے سامنے اپنا منہ نہیں لگایا؛ میں نے اپنی جوانی میں ہی پرسائی کی۔
تشریح
यह शेर जवानी और इश्क़ के तजुर्बे को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उन्होंने कभी अपने दिल की बात उस रहस्यमयी महबूबा के सामने नहीं रखी.... बल्कि जवानी में उन्होंने एक तरह का इत्मीनान और दूरी बनाए रखी।
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