न कुछ काग़ज़ में है ताने क़लम को दर्द नालों का
लिखूँ क्या 'इश्क़ के हालात ना-महरम हैं ये दोनों
“There are no complaints for the pen on paper, but what shall I write? These two circumstances of love are sacred.”
— میر تقی میر
معنی
کاغذ پر قلم کو طعنے دینے کے لیے کچھ نہیں ہے، مگر میں کیا لکھوں؟ یہ دونوں عشق کے حالات نا-محرم ہیں۔
تشریح
ये शेर उस दर्द को बयान करता है जो शब्दों के दायरे से बाहर है। शायर कहते हैं कि क़लम का दर्द और स्याही के आँसू.... ये दोनों भावनाएँ इतनी निजी हैं कि इन्हें किसी के सामने ज़ाहिर नहीं किया जा सकता।
