न कटे रात हिज्र की जो न हो
नाला तेग़-ए-कशीदा के मानिंद
“If the night of separation does not end, It is like a river of drawn-out sorrow.”
— میر تقی میر
معنی
اگر جدائی کی رات ختم نہ ہو، تو یہ کھینچے ہوئے غم کی ندی کے مانند ہے۔
تشریح
ये शेर हिज्र के दर्द की शिद्दत बयान करता है। शायर कहते हैं कि वक़्त गुज़रे नहीं... ये तड़प तो उस नाले जैसी है जो खींचे गए धनुष से लगातार बहती रहती है। यह वियोग का एक ऐसा सिलसिला है जो कभी रुकता ही नहीं।
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