मिला है ख़ाक में किस किस तरह का 'आलम याँ
निकल के शहर से टक सैर कर मज़ारों का
“In what manner of 'world' has it been mixed with dust, O beloved, After wandering through the city and the graves?”
— میر تقی میر
معنی
اے محبوب، شہر اور قبروں میں گھوم کر، خاک میں کس طرح کا 'عالم' مل گیا ہے؟
تشریح
यह शेर ज़िंदगी के सच से रूबरू कराने वाला नज़्म है। शायर कहते हैं कि किसी भी रईस या ग़रीब की असलियत.... कब्रों की सैर करके ही पता चलती है। यह तौबा-ए-हयात (ज़िंदगी की सच्चाई) का इज़हार है।
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