जिस जा कि ख़स-ओ-ख़ार के अब ढेर लगे हैं
याँ हम ने उन्हें आँखों से देखें हैं बहारें
“The mounds of thorns and roses that they have made, We have seen the springs of bloom with our eyes.”
— میر تقی میر
معنی
جس جگہ پر خُس و خَار کے ڈھیر لگے ہیں، ہم نے وہاں پھولوں کی بہاریں اپنی آنکھوں سے دیکھیں ہیں۔
تشریح
यह शेर बताता है कि ज़िंदगी की राह भले ही काँटों से भरी हो, लेकिन उम्मीद और खुशियों की बहारें देखना मुमकिन है। दर्द के बीच भी, खूबसूरती का एहसास हमेशा ज़िंदा रहता है।
