इक निगाह-ए-आश्ना को भी वफ़ा करता नहीं
वा हुईं मिज़्गाँ कि सब्ज़ा सब्ज़ा-ए-बेगाना था
“Even a glance of a beloved soul does not remain faithful; how can the willow branch be anything but stranger's green?”
— میر تقی میر
معنی
کسی اپنے کی ایک نظر بھی وفا نہیں کرتی؛ تو یہ مِزگاں کیسے پرایا سبز ہو سکتا ہے۔
تشریح
ये शेर उस गहरे धोखे का इज़हार है, जहाँ महबूब की नज़र में भी वफ़ा नहीं है। यह एहसास दिलाता है कि रिश्ते कितने नाज़ुक होते हैं, और विश्वास का टूटना कितना दर्दनाक होता है।
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