शौक़-ए-रुख़ याद-ए-लब ग़म-ए-दीदार
जी में क्या क्या मिरे रहा साहब
“The yearning for your face, the memory of your lips, the sorrow of seeing you, What all remains within me, my master?”
— میر تقی میر
معنی
شوقِ رُخ یادِ لب غمِ دیدار، جی میں کیا کیا میرے رہا صاحب
تشریح
यह शेर दिल की सारी उलझनें बयान करता है। शायर कहते हैं कि चेहरे की चाहत, होंठों की याद, और बिछड़ने का ग़म... इन सब ने मेरे दिल में क्या-क्या तूफान मचा दिया है। यह दर्द सिर्फ़ वियोग का नहीं, बल्कि यादों के बोझ का है।
