क्या जानें वे मुर्ग़ान-ए-गिरफ़्तार-ए-चमन को
जिन तक कि ब-सद-नाज़ नसीम-ए-सहर आवे
“How can they know the secret of the garden-like prisoners, whom the gentle breeze of dawn does not touch?”
— میر تقی میر
معنی
وہ کیا جانیں باغی قیدیوں کا، جنہیں صبح کی ٹھنڈی ہوا چھو نہیں پاتی؟
تشریح
यह शेर उन नज़ारों और एहसासों की बात करता है जो आम लोगों को कभी देखने को नहीं मिलते। शायर कहते हैं कि बाग़ के क़ैद पक्षियों का हाल कौन जान सकता है? यह एहसास उस सुबह की हवा जैसा है, जो सौ बरस में एक बार आती है—यानी, कुछ पल बहुत ही ख़ास और दुर्लभ होते हैं।
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