इस ग़ज़ल पर शाम से तो सूफ़ियों को वज्द था
फिर नहीं मालूम कुछ मज्लिस की क्या हालत हुई
“This ghazal, from the evening, had ecstasy for the Sufis, But I don't know what condition the gathering has fallen into.”
— میر تقی میر
معنی
इस غزل پر شام کو صوفیوں میں وجد تھا، مگر اب نہیں معلوم کہ محفل کی کیا حالت ہوئی ہے۔
تشریح
यह शेर किसी भी महफ़िल के बदलते मिज़ाज को बयां करता है। शुरू में तो ग़ज़ल ने सूफ़ियों को एक गहरा 'वज्द' दिया.... मगर अंत तक तो महफ़िल का आलम ही कुछ और हो गया।
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