हम न कहते थे कि नक़्श उस का नहीं नक़्क़ाश सहल
चाँद सारा लग गया तब नीम-रुख़ सूरत हुई
“We never said that the design was not the craftsman's ease, Only when the moon was consumed, did the face turn bitter.”
— میر تقی میر
معنی
ہم کبھی نہیں کہتے تھے کہ نقش اس کا نہقکش کی سہل ہے۔ جب چاند سارا لگ گیا، تب نیم رخ صورت ہوئی।
تشریح
शायर कह रहे हैं कि उन्हें कभी कारीगर की कला पर संदेह नहीं था। मगर जब चाँद पूरी तरह खिला, तो महबूब का चेहरा कड़वा क्यों लगने लगा। यह अहसास कराता है कि पूर्णता में भी एक कड़वा सच छिपा होता है।
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