आ बैठता था सूफ़ी हर सुब्ह मय-कदे में
शुक्र-ए-ख़ुदा कि निकला वाँ से ख़राब हो कर
“The Sufi used to sit in my heart every morning, By the grace of God, it emerged from there, ruined.”
— میر تقی میر
معنی
شاعِر کہتا ہے کہ صوفی ہر صبح میرے دل میں بیٹھتا تھا، اور شکرِ خدا کہ وہ وہاں سے خراب ہو کر نکلا۔
تشریح
यह शेर सूफ़ी फ़नक़ की उस अवस्था का ज़िक्र करता है, जहाँ रोज़ाना मयखाने में बैठना रूहानी सफ़र का हिस्सा है। 'ख़राब होकर निकलना' दरअसल एक तब्दीली है; यह बताता है कि इल्म की राह में तज़किरे और बेचैनी का होना ज़रूरी है।
