टपका करे है आँख से लोहू ही रोज़-ओ-शब
चेहरे पे मेरे चश्म है या कोई घाव है
“A stream of blood flows from my eye, day and night, Is it my spectacle lens, or merely a wound's blight?”
— میر تقی میر
معنی
آنکھ سے روز و شب لہو ٹپکنا، کیا یہ میرے چشمے کا عینک ہے یا کوئی زخم۔
تشریح
यह शेर दिल के ज़ख्म को बयान करता है, जहाँ ग़म का सैलाब है। आँखों से जो नज़ल टपकती है, वह अब लहू जैसी लगती है। शायर पूछते हैं कि ये क्या है—सिर्फ़ चश्मे का साया, या कोई गहरा घाव।
