कैसे कैसे मकान हैं सुथरे
इक अज़ाँ जुमला कर्बला है याँ
“How many clean houses there are, / One is the whole of Karbala.”
— میر تقی میر
معنی
शायर कह रहे हैं कि ये मकान बाहर से कितने साफ़-सुथरे दिखते हैं, लेकिन असलियत में ये सब कर्बला के गम जितने ही दर्दनाक हैं।
تشریح
शायर ने यहाँ एक विरोधाभास पेश किया है। मकानों की सफ़ाई और नज़ाकत के बावजूद, अज़ान की आवाज़ में जो दर्द है, वह कर्बला के महासंग्राम की याद दिलाती है। यह बाहरी सुकून और अंदरूनी ग़म का संगम है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
