कोह-ओ-सहरा भी कर न जाए बाश
आज तक कोई भी रहा है याँ
“The Koh-e-Sahar (Mountain of the Desert) cannot even make a sound, No one has ever remained here till today.”
— میر تقی میر
معنی
कोह-ओ-सहरा भी कर न जाए बाश, आज तक कोई भी रहा है याँ। इसका अर्थ है कि पहाड़ और रेगिस्तान भी यहाँ हमेशा नहीं रहेंगे; आख़िरत इस दुनिया में आज तक कोई भी स्थायी रूप से नहीं रहा है।
تشریح
यह शेर मुहब्बत की रूहानी ताक़त का इज़हार है। शायर कहते हैं कि कोह-ओ-सहरा की विशालता भी एक याद की खुशबू को मिटा नहीं सकती। ये सवाल करता है कि क्या वाकई कोई इस एहसास से दूर हो पाया है।
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