तअम्मुल तो था उन को आने में क़ासिद
मगर ये बता तर्ज़-ए-इंकार क्या थी
“The contemplation was for them to arrive, But tell me, what was this style of denial?”
— علامہ اقبال
معنی
تأمل تو تھا انہیں آنے میں قاصد، مگر یہ بتا ترزِ انکار کیا تھی؟
تشریح
ये शेर उस कशमकश को बयान करता है जब इरादा और अमल में तफ़ावूत होता है। शायर कह रहे हैं कि आने का ख़्याल तो था.... लेकिन वो इनकार करने का जो तरीक़ा था, वो दिल को चुभ रहा है। सवाल इनकार पर नहीं, बल्कि इनकार के अंदाज़ पर है।
