भरी बज़्म में अपने आशिक़ को ताड़ा
तिरी आँख मस्ती में हुश्यार क्या थी
“In the crowded gathering, I called out to my lover, Oh, how clever were your eyes in your drunken ecstasy?”
— علامہ اقبال
معنی
بھری بزم میں، میں نے اپنے محبوب کو پکارا، اے! تمہاری مستی میں تمہاری آنکھیں کتنی ہوشیار تھیں۔
تشریح
यह शेर महबूब के नशीले नज़रों का ज़िक्र करता है। शायर कह रहे हैं कि महफ़िल में चाहे कितना भी शोर हो, आपकी आँखों की मस्ती ने मेरे सारे होश उड़ा दिए। यह इश्क़ की उस बेबसी को बयां करता है जहाँ रूह का वजूद भी बेबस हो जाए।
