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अगरचे बहर की मौजों में है मक़ाम इस का
सफ़ा-ए-पाकी-ए-तीनत से है गुहर का वुज़ू

Though its station is in the waves of the ocean, its cleansing is from the purity of the Trinity.

علامہ اقبال
معنی

اگرچہ بہر کی موجوں میں ہے مقام اس کا، صفائے پاکیِ تینت سے ہے گہر کا وضو

تشریح

यह शेर बताता है कि इंसान की असल पहचान और पवित्रता कहीं बाहर की परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती। चाहे ज़िन्दगी की लहरें कितनी भी उथल-पुथल मचा दें, गुहर का वुज़ू तो हमेशा उसके अपने अंदर की पाकीज़गी से ही आता है।

آڈیو

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