अब न वो प्रेम में वो गर्मजोशी बची, न सौंदर्य में पहले जैसी चमक
अब न ग़ज़नवी में वो तड़प रही, न अयाज़ की ज़ुल्फ़ों में वो पहले जैसे फन्दे
“Now that warmth in love is gone, nor the shine of beauty as before; now that yearning in Ghaznavi is absent, nor the magic in Ayaz's tresses as before.”
— علامہ اقبال
معنی
اب نہ وۂ پیار میں وہ گرمجوشی بچی، نہ حُسن میں پہلے جیسی چمک؛ اب نہ غزنوی میں وہ تڑپ رہی، نہ ایاز کی زُلفوں میں وہ پہلے جیسے پھندے۔
تشریح
यह शेर समय के गुज़र जाने का आलम बयां करता है। शायर कहते हैं कि प्रेम की गरमाहट और सौंदर्य की चमक, दोनों ही वक़्त के साथ फीकी पड़ जाती हैं। हर चीज़ का एक अंत होता है, और यह शेर उसी नश्वरता को दर्शा रहा है।
