इस अंदेशे से ज़ब्त-ए-आह मैं करता रहूँ कब तक
कि मुग़-ज़ादे न ले जाएँ तिरी क़िस्मत की चिंगारी
“How long shall I remain captive to this grief-filled thought, Lest the Mughal-descendants steal the spark of your fate?”
— علامہ اقبال
معنی
اس اداس خیال سے میں اپنی آہوں کو کب تک باندھے رہوں، کہیں مغل وراثت کی میری قسمت کی چنگاری نہ لے جائیں۔
تشریح
यह शेर एक गहरे भावनात्मक संघर्ष को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि वह अपने अहसास और आह को इस मामूली ख़याल से कब तक क़ैद कर पाएगा.... क्योंकि उन्हें डर है कि 'मुग़ज़ादे' उनकी क़िस्मत की वो छोटी-सी चिंगारी भी छीन लेंगे।
