आक़िबत क्या होवेगा मालूम नईं — वली दकनी

आक़िबत क्या होवेगा मालूम नईं दिल हुआ है मुब्तिला दिलदार का

“What my ultimate fate shall be, I do not know; this heart has fallen captive to the beloved.”

— वली दकनी

अर्थ

मुझे नहीं पता कि अंत में मेरा अंजाम क्या होगा; मेरा दिल महबूब के प्यार में मुब्तिला हो चुका है।

विस्तार

इस शेर में इश्क़ का एक मासूम और बेपरवाह समर्पण झलकता है। आशिक़ का दिल अपने महबूब की चाहत में इस कदर गिरफ़्तार हो चुका है कि उसे अपने अंजाम या मुक़द्दर की कोई परवाह नहीं रही। यहाँ 'आक़िबत' (अंजाम) की बेख़बरी में कोई डर नहीं, बल्कि एक मीठा सा सुकून है—जैसे कह रहे हों कि जब दिल ही किसी के नाम कर दिया, तो फिर कल की फ़िक्र कैसी!

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