ज़िंदगी है जिस कूँ दाइम आलम-ए-बाक़ी मुनीं — वली दकनी
“For one whose life is eternal in the enduring realm, when could this fleeting mortal world ever manifest its splendor before him?”
अर्थ
जिस व्यक्ति को हमेशा रहने वाले लोक में अमर जीवन प्राप्त है, उसके सामने यह नश्वर संसार कभी अपना रूप या आकर्षण कैसे दिखा सकता है?
विस्तार
शायर यहाँ एक बहुत सुंदर रूहानी हक़ीक़त बयान कर रहे हैं कि जिस इंसान का दिल हमेशा क़ायम रहने वाली उस ईश्वरीय दुनिया से जुड़ चुका हो, उस पर इस नश्वर संसार की झूठी चमक कभी असर नहीं कर सकती। जब किसी को शाश्वत और अमर सत्य का दीदार हो जाए, तो यह मिट जाने वाली दुनिया उसके आगे अपनी नुमाइश नहीं कर सकती। यह शेर हमें याद दिलाता है कि असली ज़िंदगी वह है जो हमेशा रहने वाली है, न कि यह जो चंद लम्हों की मोहताज है।
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