सोहबत-ए-ग़ैर मूं जाया न करो — वली दकनी
“Do not frequent the company of rivals, I plead; / Torment not the hearts that already ache and bleed.”
अर्थ
दूसरों (ग़ैरों) की संगत में मत जाया करो और दर्द से पीड़ित दुखियारों को मत तड़पाया करो।
विस्तार
इस शेर में एक आशिक़ की बेहद मासूम और दर्द भरी गुज़ारिश है कि उसका महबूब गै़रों की महफ़िलों में न जाया करे। जो दिल पहले ही मोहब्बत के दर्द और जुदाई में झुलस रहे हैं, उन्हें रक़ीबों की सोहबत दिखा-दिखा कर और ज़्यादा मत तड़पाइए। यहाँ शिकवे से ज़्यादा एक गहरा अपनापन और बेबसी है, जहाँ आशिक़ अपने नाज़ुक दिल पर और ज़ख़्म न सह पाने की दुहाई दे रहा है।
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