ऐ 'वली' सर्व-क़द को देखूँगा — वली दकनी

ऐ 'वली' सर्व-क़द को देखूँगा वक़्त आया है सरफ़राज़ी का

“O Wali, I shall gaze upon that cypress-tall beloved; the hour has arrived for exaltation, to lift my head on high.”

— वली दकनी

अर्थ

ऐ वली, मैं उस सर्व जैसे लंबे क़द वाले महबूब को देखूँगा; अब गर्व से सिर ऊँचा करने और सम्मान पाने का वक़्त आ गया है।

विस्तार

यहाँ वली ने लफ़्ज़ों का एक बहुत प्यारा खेल खेला है। महबूब 'सर्व-क़द' है यानी सरू के पेड़ की तरह लंबा और दिलकश, जिसे देखने के लिए आशिक़ को अपना सिर ऊपर उठाना पड़ता है। शायर इसी सिर उठाने को 'सरफ़राज़ी' यानी इज़्ज़त और बुलंदी से जोड़ते हैं। एक आशिक़ के लिए अपने महबूब का दीदार पाना महज़ देखना नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान और फ़ख़्र है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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