इश्क़ में सब्र-ओ-रज़ा दरकार है फ़िक्र-ए-असबाब-ए-वफ़ा दरकार है

“In love, endurance and surrender are required; a care for the very means of devotion is required.”

— वली दकनी
अर्थ

इश्क़ में सब्र और महबूब की रज़ा की आवश्यकता होती है, और वफ़ा निभाने के साधनों की फ़िक्र करना भी ज़रूरी होता है।

विस्तार

यह शेर हमें बताता है कि इश्क़ महज़ जज़्बातों का तूफ़ान नहीं, बल्कि दिल की एक गहरी साधना है। इसमें महबूब की हर आज़माइश को मुस्कुराकर स्वीकार करने के लिए बेपनाह सब्र और रज़ा चाहिए। साथ ही, वफ़ा सिर्फ़ कहने से नहीं निभती; उसके लिए हर उस साधन और त्याग की फ़िक्र करनी पड़ती है जो इस रिश्ते को हमेशा पाकीज़ा और ज़िंदा रखे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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