इश्क़ बेताब-ए-जाँ-गुदाज़ी है हुस्न मुश्ताक़-ए-दिल-नवाज़ी है

“Love is restless for the soul's consuming fire, / To soothe and charm the heart is Beauty's fond desire.”

— वली दकनी
अर्थ

इश्क़ अपनी जान को पिघलाने और मिटाने के लिए बेचैन है, जबकि हुस्न दिलों को बहलाने और उन पर मेहरबानी करने का इच्छुक है।

विस्तार

यहाँ शायर इश्क़ और हुस्न के बीच के खूबसूरत रिश्ते को बड़े ही नाज़ुक अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। इश्क़ की फ़ितरत ही ऐसी है कि वह महबूब के लिए अपनी जान तक को पिघला देने, यानी पूरी तरह फ़ना हो जाने को बेताब रहता है। वहीं दूसरी तरफ़, हुस्न भी बेपरवाह नहीं है; वह भी किसी टूटे दिल को अपनी नज़ाकत से सुकून और तसल्ली बख्शने के लिए उतना ही बेचैन है। एक तरफ़ खुद को मिटाने का जूनून है और दूसरी तरफ़ मरहम रखने की चाह, और इसी प्यारे से ताल्लुक़ से मोहब्बत मुकम्मल होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.