“Love is restless for the soul's consuming fire, / To soothe and charm the heart is Beauty's fond desire.”
इश्क़ अपनी जान को पिघलाने और मिटाने के लिए बेचैन है, जबकि हुस्न दिलों को बहलाने और उन पर मेहरबानी करने का इच्छुक है।
यहाँ शायर इश्क़ और हुस्न के बीच के खूबसूरत रिश्ते को बड़े ही नाज़ुक अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। इश्क़ की फ़ितरत ही ऐसी है कि वह महबूब के लिए अपनी जान तक को पिघला देने, यानी पूरी तरह फ़ना हो जाने को बेताब रहता है। वहीं दूसरी तरफ़, हुस्न भी बेपरवाह नहीं है; वह भी किसी टूटे दिल को अपनी नज़ाकत से सुकून और तसल्ली बख्शने के लिए उतना ही बेचैन है। एक तरफ़ खुद को मिटाने का जूनून है और दूसरी तरफ़ मरहम रखने की चाह, और इसी प्यारे से ताल्लुक़ से मोहब्बत मुकम्मल होती है।
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