“O Wali, deep within my chest, the cruel claw of love / Has torn the garment of the heart, slowly and by degrees.”
ऐ वली, मेरे सीने में ज़ालिम इश्क़ के पंजे ने आहिस्ता-आहिस्ता दिल के लिबास को चाक (तार-तार) कर दिया है।
वली यहाँ इश्क़ को एक बेदर्द शिकारी की तरह पेश कर रहे हैं, जिसके नुकीले पंजों ने उनके सीने में अपनी पकड़ बना ली है। यह प्यार दिल को एक ही झटके में छलनी नहीं करता, बल्कि उसके रेशे-रेशे और हिफ़ाज़त के पैरहन को बहुत आहिस्ता-आहिस्ता तार-तार करता है। इस ख़ूबसूरत शेर में उस दर्द की दास्तान है जो अचानक नहीं आता, बल्कि वक़्त के साथ हौले-हौले रूह में उतरता चला जाता है।
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