है सुख़न जग मनीं अदीम-उल-मिसाल जुज़ सुख़न नीं दुजा जवाब-ए-सुख़न

“Within this world, the art of verse is peerless and profound; save speech itself, no match for speech could ever yet be found.”

— वली दकनी
अर्थ

इस संसार में सुख़न (कविता या वाणी) बेमिसाल है, और सुख़न के अलावा सुख़न का कोई दूसरा जवाब या सानी नहीं है।

विस्तार

यह शेर अल्फ़ाज़ और शायरी की बेमिसाल ताक़त का जश्न मनाता है। शायर का कहना है कि इस पूरी दुनिया में सुख़न यानी लफ़्ज़ों और कलाम की कोई सानी नहीं है; यह अपने आप में अनोखा जादू है। अगर किसी ख़ूबसूरत बात या शेर का कोई जवाब हो सकता है, तो वह सिर्फ़ दूसरा कलाम ही हो सकता है। यह ज़बान और शायरी को इंसान के दिल और रूह की सबसे अनमोल दौलत के तौर पर पेश करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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