हर्जा़-गोयाँ की बात क्यूँकि सुने जो सुना नग़्मा-ए-रबाब-ए-सुख़न

“Why would anyone heed the babble of idle talkers, having once heard the melody played upon poetry's lute?”

— वली दकनी
अर्थ

जिसने शायरी के रबाब का मधुर तराना सुन लिया हो, वह भला फ़ज़ूल बकने वालों की बातें क्यों सुनेगा?

विस्तार

शायर यहाँ एक बहुत खूबसूरत बात कह रहे हैं—जिसने शायरी की रूहानी धुन सुन ली हो, वह भला फ़ज़ूल बकवास करने वालों की बातों पर क्यों ध्यान देगा? यहाँ उम्दा शायरी को 'रबाब' यानी एक सुरीले साज़ की तरह देखा गया है, जिसकी तान सीधे रूह में उतर जाती है। जब इंसान को गहरे और पुरअसर लफ़्ज़ों का चस्का लग जाता है, तो फिर बेमायने शोर और खोखली बातें उसे बिल्कुल गवारा नहीं होतीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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