निकली है जस्त कर कर हर संग-दिल सूँ आतिश चक़माक़ जब पलक की झाड़ा है तूँ अदा सूँ

“Fire leaped forth in sparks from every heart of stone, whenever with graceful charm you struck the flint of your lashes.”

— वली दकनी
अर्थ

जब भी तुमने नज़ाकत और अदा से अपनी पलकों के चक़माक़ पत्थर को रगड़ा या झटका है, तब हर पत्थर-दिल इंसान के सीने से उछलकर आग भड़क उठी है।

विस्तार

यहाँ शायर ने महबूब की पलकों की तुलना चक़माक़ यानी आग सुलगाने वाले पत्थर से की है। जब महबूब अपनी पलकें नज़ाकत और अदा से झपकाता है, तो गोया पत्थर पर चोट पड़ती है और हर संग-दिल यानी पत्थर दिल इंसान के सीने से भी इश्क़ की चिंगारियाँ फूट पड़ती हैं। यह शे’र बेहद ख़ूबसूरती से बयान करता है कि महबूब के हुस्न और अदा के सामने कोई भी, चाहे वह कितना ही बेपरवाह क्यों न हो, बेअसर नहीं रह सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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