“Right before your radiant presence, that candle dares to boast its grace; / Just behold the oily-tongued insolence of that shameless flame!”
तुम्हारी मौजूदगी में भी वह शमा अपनी ख़ूबसूरती की डींगें मार रही है; ज़रा उस बेशर्म की चापलूसी और ज़बान-दराज़ी तो देखो।
यहाँ शायर महबूब के नूरानी चेहरे के आगे मोमबत्ती यानी शमा की गुस्ताख़ी पर प्यार भरी चुटकी ले रहा है। महबूब के हुस्न की चमक के सामने भी शमा अपनी रौशनी का दम भर रही है, और शायर उसकी पिघलती चर्बी व लौ को उसकी 'चर्ब-ज़बानी' यानी चिकनी-चुपड़ी बातों से जोड़ता है। यह महबूब की तारीफ़ का एक बेहद शोख़ और ख़ूबसूरत अंदाज़ है, जिसमें दुनिया की हर रोशन चीज़ उसके नूर के आगे फीकी और बेअदब नज़र आती है।
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