“Adore the friend of the helpless, radiant like the sun, who destroys the lineage of demons; the joy of Raghu’s line, the fountainhead of bliss, the moon of Kosala, and Dasharatha’s beloved son.”
दीनों के बंधु, सूर्य के समान तेजस्वी, दानवों और दैत्यों के वंश का नाश करने वाले, रघुकुल को आनंद देने वाले, परमानंद के मूल स्रोत, कोशल के चंद्रमा और महाराज दशरथ के पुत्र श्री राम का भजन करो।
यह सुंदर पद हमें प्रेमपूर्वक भगवान श्री राम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। प्रभु राम दीनों और असहायों के सच्चे बंधु हैं तथा सूर्य के समान दिव्य और तेजस्वी हैं। वे बुराई और आसुरी शक्तियों का नाश करने वाले परम रक्षक हैं। रघुकुल का मान बढ़ाने वाले और कौशल देश के चंद्रमा के समान शीतल, श्री राम ही समस्त आनंद के मूल स्रोत हैं। राजा दशरथ के प्रिय पुत्र के रूप में वे हर हृदय को सुख और संबल देते हैं। इस पद को गाने और सुनने से मन में असीम शांति, विश्वास और भक्ति का संचार होता है।
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