“Surpassing countless gods of love in boundless grace, beautiful as a fresh blue lotus in bloom; in yellow silks pure as a flash of lightning, I bow to the noble groom of Janaka's daughter.”
जिनका सौंदर्य अनगिनत कामदेवों से भी बढ़कर और नवीन नीले कमल के समान मनोहर है, तथा जिनके पीले वस्त्र बिजली के समान चमकीلے और पवित्र हैं, मैं जनकपुत्री (सीता) के वर श्री राम को नमन करता हूँ।
इस पावन छंद में भगवान श्री राम के अलौकिक सौंदर्य का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि प्रभु का रूप अनगिनत कामदेवों की सुंदरता को भी मात देने वाला है। उनका सांवला स्वरूप नए खिले नीले कमल के समान कोमल और मनभावन है। उनके पीले वस्त्र ऐसे चमकते हैं, मानो मेघों के बीच बिजली की पवित्र चमक कौंध रही हो। कवि माता सीता के प्रियतम प्रभु श्री राम को अत्यंत आदर और प्रेम से प्रणाम करते हैं। यह पंक्तियां हमें प्रभु की दिव्य छवि का ध्यान करने और हृदय में भक्ति जगाने की सुंदर प्रेरणा देती हैं।
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