“Mighty sovereigns like Sahasrabahu and ten-headed Ravana escaped not all-powerful Death; with vain pride we amassed wealth and built estates, only to depart in the end empty-handed.”
सहस्रबाहु और रावण जैसे शक्तिशाली राजा भी बलवान काल (मृत्यु) से नहीं बच सके। मनुष्य अहंकार में 'मैं-मैं' करके धन और संपत्तियां जुटाता रहा, लेकिन अंत में सब खाली हाथ ही चले गए।
यह दोहा हमें जीवन की नश्वरता और अहंकार की व्यर्थता का बोध कराता है। सहस्रबाहु और रावण जैसे अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी राजा भी सर्वशक्तिमान काल यानी मृत्यु से बच नहीं पाए। मनुष्य जीवन भर मैं और मेरा के भ्रम में उलझा रहता है, धन-दौलत जोड़ने और बड़े-बड़े महल सजाने में लगा रहता है। लेकिन जब जीवन की अंतिम घड़ी आती है, तो सब कुछ यहीं छूट जाता है और इंसान को खाली हाथ ही विदा होना पड़ता है। यह दोहा हमें समझाता है कि भौतिक संपदा और झूठे घमंड के पीछे भागने के बजाय, हमें विनम्रता अपनानी चाहिए और अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
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