हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हों । साधन-धाम बिबुध-दुर्लभ तनु मोहि कृपा करि दीन्हों ॥

“O Lord, boundless is the grace You have showered upon me; an abode of devotion, a human form rare even to the gods, You granted out of sheer mercy.”

— तुलसीदास
अर्थ

हे प्रभु, आपने मुझ पर बहुत बड़ी कृपा की है। आपने दया करके मुझे यह मानव शरीर दिया है, जो साधना का घर है और देवताओं के लिए भी अत्यंत दुर्लभ है।

विस्तार

इन सुंदर पंक्तियों में भक्त ईश्वर के प्रति असीम आभार व्यक्त करते हुए कहता है कि हे प्रभु, आपने मुझ पर बहुत बड़ी कृपा की है। आपने अपनी दया से मुझे यह मानव शरीर प्रदान किया है, जो साधना और मोक्ष का माध्यम है और जिसे पाने के लिए देवता भी तरसते हैं। भारतीय परंपरा में मानव जीवन को अमूल्य माना गया है, क्योंकि केवल इसी जन्म में हम सत्कर्म करके सत्य और परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। यह दोहा हमें यह सीख देता है कि हम अपने जीवन के महत्व को समझें, इसे व्यर्थ की बातों में न गंवाएं, और प्रेम, सेवा तथा भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ें।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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