“The supreme state that wise ascetics fail to attain through ardent yoga and renunciation, that very salvation the Lord bestowed upon the vulture and Shabari, without giving it a second thought.”
ज्ञानी मुनि योग, वैराग्य और अनेक यत्न करके भी जिस परम गति को नहीं प्राप्त कर पाते, वही मोक्ष प्रभु श्री राम ने गीध (जटायु) और शबरी को बिना किसी संकोच के सहज ही प्रदान कर दिया।
बड़े-बड़े ज्ञानी मुनि वर्षों तक कठिन योग, तप और वैराग्य का अभ्यास करते हैं, फिर भी जिस परम गति को सरलता से नहीं पा पाते, वही परम पद प्रभु श्री राम ने गीधराज जटायु और माता शबरी को सहज ही प्रदान कर दिया। यही नहीं, प्रभु ने अपने मन में यह भी नहीं माना कि उन्होंने कोई बहुत बड़ा उपकार किया है। यह चौपाई बताती है कि ईश्वर को पाने के लिए किसी कठिन साधन या भारी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। भगवान केवल सच्चे, सरल और निस्वार्थ प्रेम के भूखे हैं। जहां सच्चा समर्पण होता है, वहां उनकी असीम कृपा अपने आप बरस पड़ती है।
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