“Having found the beauteous wish-fulfilling jewel of the Holy Name, I shall not let it slip from heart or hand; Upon the pure and lovely touchstone of the Dark-hued Form, I shall assay the gold of my mind.”
मैंने राम-नाम रूपी सुंदर चिंतामणि रत्न को प्राप्त कर लिया है, अब इसे अपने हृदय और हाथ से कभी छूटने नहीं दूंगा। भगवान के पवित्र और सुंदर श्यामल रूप की कसौटी पर मैं अपने मन रूपी सोने को परखूँगा।
इन भावपूर्ण पंक्तियों में भक्त कवि कहते हैं कि उन्हें प्रभु के पावन नाम रूपी चिंतामणि रत्न प्राप्त हो गया है, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। अब वे इस अमूल्य निधि को अपने हृदय रूपी हाथ से कभी छूटने नहीं देंगे। वे प्रभु के मनमोहक और परम पवित्र श्याम रूप को एक कसौटी बनाकर अपने मन रूपी सोने को उस पर परखेंगे, ताकि चित्त पूरी तरह शुद्ध और निष्कलंक हो सके। यह पद मन के भटकाव को त्यागकर ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम, निष्ठा और समर्पण की एक सुंदर पुकार है।
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