“Until now I squandered my life, but no longer will I waste it; By Ram's grace the night of worldly illusion has ended, and having awakened, never again will I fall under its spell.”
अब तक मैंने अपना जीवन व्यर्थ गंवा दिया, लेकिन अब आगे इसे नष्ट नहीं करूँगा। श्रीराम की कृपा से सांसारिक माया-मोह की रात बीत गई है और अब जाग जाने के बाद मैं दोबारा इसमें नहीं फँसूँगा।
संत तुलसीदास जी इस पद में बड़े ही भावुक और सरल ढंग से आत्म-जागृति की बात करते हैं। वे कहते हैं कि अब तक का जीवन मैंने सांसारिक भटकाव और मोह-माया में व्यर्थ गंवा दिया, लेकिन अब आगे इसे नष्ट नहीं होने दूँगा। भगवान श्री राम की कृपा से अज्ञान और भ्रम की वह लंबी रात अब बीत चुकी है। अब जब मेरी चेतना जाग गई है, तो मैं दोबारा उस माया के जाल में नहीं फँसूँगा। यह विचार हम सभी को यह भरोसा देता है कि बीता हुआ समय चाहे जैसा भी रहा हो, जिस पल हम सच्चे मन से जाग जाते हैं, वहीं से एक नई और सुंदर शुरुआत हो जाती है।
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