“I go from house to house, praising, that, O King, you had lifted the mountain!”
मैं घर-घर जाकर इस बात की प्रशंसा करता हूँ कि हे राजन्, आपने पहाड़ उठाया था।
यह दोहा गहरी भक्ति और प्रशंसा व्यक्त करता है। वक्ता, विस्मय से भरकर, कहता है कि वे घर-घर जाकर अपने प्रिय 'राज' या 'राजा' की स्तुति करेंगे। इस व्यापक प्रशंसा का कारण एक अविश्वसनीय वीरतापूर्ण कार्य है: 'आपने पहाड़ उठा लिया!' यह पंक्ति भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की पौराणिक घटना को जीवंत करती है, जो दिव्य शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। यह उस व्यक्ति की शक्तिशाली भावना को दर्शाता है जो एक चमत्कारी कार्य से इतना प्रभावित है कि वह हर किसी के साथ उसकी महिमा साझा करने को मजबूर महसूस करता है, अपने पूजनीय आकृति की असाधारण शक्ति और करुणा का उत्सव मनाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
