જંપ નહીં જીવને આ એનો અજંપો ને ચેનથી બેચેન થાય રાત.

“No peace for the soul, such is its disquiet,And from its own comfort, the night is made restless.”

— सुरेश दलाल
अर्थ

जीव को शांति नहीं मिलती, यह उसकी बेचैनी है, और चैन से ही रात बेचैन हो जाती है।

विस्तार

यह प्रेरक दोहा मन की गहरी बेचैनी को दर्शाता है। यह बताता है कि आत्मा को सच्ची शांति नहीं मिलती और यही शांति का अभाव उसकी सहज व्याकुलता है। यह पंक्ति एक विरोधाभास को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है: कि सुकून या आराम के क्षणों में भी एक गहरी बेचैनी उभर सकती है, जिससे रात भी अशांत महसूस होने लगती है। यह एक निरंतर लालसा या अंतर्निहित उथल-पुथल के बारे में है जो बाहरी शांति से परे है। यह भावना बताती है कि कभी-कभी, अव्यवस्था की अनुपस्थिति शांति नहीं लाती, बल्कि भीतर की शांति की अधिक मौलिक कमी को उजागर करती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.