ग़ज़ल

संकल्प

عزم
सुरेश दलाल· Ghazal· 5 shers

यह ग़ज़ल भावनात्मक लगाव से एक दृढ़ थकावट और उनसे होने वाले दर्द से मुक्ति की प्रबल इच्छा व्यक्त करती है। शायर नए रिश्ते बनाने या पुराने सुधारने से स्पष्ट रूप से इनकार करता है, और मानवीय प्रेम के भ्रम से मुक्त एक खुले, बोझरहित अस्तित्व को चुनता है। यह आत्मनिर्भरता और हृदय की कमजोरियों से आज़ादी की एक घोषणा है।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
હવે નવા નવા સંબંધો બાંધવા નથી, મારે તૂટેલા ધાગાઓ સાંધવા નથી.
अब नए-नए संबंध नहीं बनाने हैं, और न ही मुझे टूटे हुए धागों को जोड़ना है।
2
ખુલ્લું આકાશ; હવે ક્યાંયે દીવાલ નહીં, હૈયું વિવશ કરે એવું કોઈ વ્હાલ નહીં,
खुला आकाश है और अब कहीं कोई दीवार नहीं है। ऐसा कोई प्रेम नहीं है जो हृदय को विवश कर दे।
3
ભલૈ હૈયું આ રણ; પણ ઝાંઝવાં નથી, હવે નવા નવા સંબંધો બાંધવા નથી.
यह हृदय भले ही एक रेगिस्तान है, पर इसमें मृगतृष्णा नहीं है। अब नए रिश्ते बनाने की कोई इच्छा नहीं है।
4
નહીં કોઈ એક બાગ કે કોઈ એક ડાળ કે કોઈ એક ફૂલ, માનવનો મુઠ્ઠીભર પ્રેમ એ તો વચકીને કોઈ દિવસ ભાંગે એ ભૂલ.
मानव का प्रेम किसी एक बाग, डाल या फूल तक सीमित नहीं है। यह सोचना कि मनुष्य का मुट्ठी भर प्रेम किसी दिन अचानक टूट सकता है, यह एक भूल है।
5
મારે મૃગજળથી લોચનને માંજવાં નથી, હવે નવા નવા સંબંધો બાંધવા નથી.
मैं मृगजल से अपनी आँखें साफ़ नहीं करना चाहता, और अब नए संबंध नहीं बनाना चाहता हूँ।
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संकल्प | Sukhan AI