“You are the close companion of the beautiful Shyam, and the lord of all yoga; Surdas marvels at the glory of that divine love, which even the Lord of the Universe seeks to know.”
आप सुंदर श्याम के मित्र हैं और समस्त योग के ज्ञाता हैं। सूरदास कहते हैं कि उस प्रेम-रस की महिमा कितनी अद्भुत है, जिसके बारे में स्वयं जगत के स्वामी श्रीकृष्ण भी पूछते हैं।
इस पद में गोपियाँ उद्धव जी से बड़े स्नेह और सहज भाव से बात करती हैं। वे कहती हैं कि आप तो साक्षात श्रीकृष्ण के परम मित्र हैं और ज्ञान व योग के महान ज्ञाता भी हैं। फिर भी, वे प्रेमपूर्वक यह समझाती हैं कि कोरा ज्ञान और नियम उस सच्चे प्रेम रस की तुलना कभी नहीं कर सकते। सूरदास जी कहते हैं कि इस पावन प्रेम की महिमा इतनी दिव्य है कि स्वयं ईश्वर भी इसे सबसे ऊपर रखते हैं। गोपियों के अनुसार प्रभु को पाने का सबसे सुंदर और सच्चा मार्ग केवल निस्वार्थ, समर्पित और निर्मल भक्ति ही है।
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