सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई जनमतहीको धूत । सूर स्याम मो गोधनकी सौं हौं माता तू पूत ॥

“Listen, Kanha, Balbhadra is a slanderer, a rogue from the moment of his birth; Surdas sings: O Shyam, I swear by my sacred herd, I am your mother and you are my son.”

— सूरदास
अर्थ

हे कान्हा! सुनो, बलराम चुगलखोर और जन्म से ही धूर्त हैं। सूरदास कहते हैं कि यशोदा कहती हैं—हे श्याम, मुझे अपने गोधन की सौगंध है कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ और तुम मेरे पुत्र हो।

विस्तार

सूरदास जी के इस पद में माता यशोदा अपने नन्हे कान्हा को बड़े दुलार से मना रही हैं। बलराम के चिढ़ाने से कान्हा रूठ गए थे कि यशोदा उनकी सगी माँ नहीं हैं। बालक कृष्ण के मन से यह शंका मिटाने के लिए यशोदा जी कहती हैं, हे कान्हा, सुनो। बलराम तो जन्म से ही चुगलखोर और धूर्त है, तुम उसकी बातों में मत आओ। फिर वे अपनी सबसे प्रिय गऊओं की सौगंध खाकर कहती हैं कि मैं सचमुच तुम्हारी माँ हूँ और तुम मेरे अपने प्यारे पुत्र हो। यह प्रसंग वात्सल्य रस से भरा हुआ है, जहाँ एक माँ का गहरा प्रेम अपने बच्चे के मासूम दिल को ढांढस बंधाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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