“Now Hari closes his tender eyes, now his soft lips flutter and play; Believing Him asleep, she turns hushed and silent, and motions with her hands to keep them away.”
कभी श्री कृष्ण अपनी पलकें मूँद लेते हैं और कभी अपने होंठ फड़काते हैं। उन्हें सोता हुआ समझकर माता यशोदा चुप हो जाती हैं और हाथ के इशारे से दूसरों को भी शांत रहने को कहती हैं।
सूरदास जी के इस प्यारे पद में बाल कृष्ण के सोने का बहुत ही सुंदर वर्णन है। नन्हे कान्हा कभी अपनी आँखें मूँद लेते हैं और कभी सोते-सोते उनके होंठ फड़कने लगते हैं। उन्हें देखकर माता यशोदा समझती हैं कि लल्ला अब सो गया है। बालक की नींद में कोई बाधा न पड़े, इसलिए मैया खुद एकदम चुप हो जाती हैं। वह आसपास मौजूद लोगों को भी हाथों के इशारे से शांत रहने को कहती हैं ताकि कोई आवाज़ न हो। यह पद माँ यशोदा के निश्छल प्रेम और वात्सल्य भाव को बड़ी ही मिठास के साथ दर्शाता है।
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