“Mother Yashoda rocks infant Hari in his cradle; swaying, fondling, and caressing him gently, she sings whatever soft lullaby comes to her heart.”
माता यशोदा बाल कृष्ण को पालने में झुला रही हैं। वे उन्हें हिलाती-दुलारती और पुचकारती हैं तथा जो मन में आता है, वही गाकर सुलाने की कोशिश करती हैं।
सूरदास जी के इस अत्यंत सुंदर पद में माता यशोदा का बाल कृष्ण के प्रति वात्सल्य प्रेम झलकता है। यशोदा मैया नन्हे कान्हा को पालने में झुला रही हैं। वे पालने को हौले-हौले हिलाती हैं, अपने लाडले को दुलारती हैं, पुचकारती हैं और जो भी मीठे भाव मन में आते हैं, उन्हें लोरी बनाकर गुनगुनाने लगती हैं। वे चाहती हैं कि उनका नन्हा गोपाल सुख से सो जाए। यह पद एक माँ की असीम ममता और वात्सल्य की मधुर छांव को बहुत ही आत्मीयता से दर्शाता है।
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