काहेको हम ब्रजतन आवति खेलति रहति आपनी पौरी । सुनति रहति श्रवणनि नँद ढोटा करत रहत माखन दधि चोरी ॥

“Why would we ever wander into Braj? We stay playing on our own threshold; Yet our ears keep hearing that Nanda's lad goes around stealing butter and curd.”

— सूरदास
अर्थ

हम भला ब्रज की तरफ क्यों आएं, हम तो अपनी ही देहरी पर खेलते रहते हैं; बस अपने कानों से यह सुनते रहते हैं कि नंद का लड़का माखन और दही चुराता फिरता है।

विस्तार

सूरदास जी के इस सुंदर पद में राधा और कृष्ण की पहली बाल-सुलभ भेंट का प्यारा प्रसंग है। जब कान्हा राधा जी से उनका परिचय पूछते हैं, तो राधा जी बड़े नटखट और सहज अंदाज में जवाब देती हैं। वे कहती हैं कि भला हम ब्रज की गलियों में क्यों आएं, हम तो अपने ही घर के दरवाजे पर खेलते रहते हैं। फिर वे मुस्कुराते हुए चुटकी लेती हैं कि हमने अपने कानों से खूब सुन रखा है कि नंद का लाडला हर जगह माखन और दही की चोरी करता फिरता है। यह मीठी तकरार दोनों के निश्छल प्रेम और अपनत्व की प्यारी शुरुआत को दर्शाती है।

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काहेको हम ब्रजतन आवति खेलति रहति आपनी पौरी । | Sukhan AI