ग़ज़ल

बूझत स्याम कौन तू गोरी

بوجھت شیام کون تو گوری
सूरदास· Pad· 3 shers

इस पद में बालकृष्ण और राधा के प्रथम मिलन का अत्यंत मधुर एवं विनोदपूर्ण संवाद चित्रित है। श्रीकृष्ण उत्सुकता से राधा का परिचय पूछते हैं, जिस पर राधा चपलता और कटाक्ष से जवाब देते हुए माखन चुराने वाले नंद के बेटे की चर्चा छेड़ देती हैं।

Source: Sankshipt Sursagar (Indian Press, 1924) · HI

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
बूझत स्याम कौन तू गोरी । कहाँ रहित काकी है बेटी देखी नहीं कहूँ ब्रज खोरी ॥
श्रीकृष्ण पूछते हैं कि हे गोरी लड़की, तुम कौन हो? तुम कहाँ रहती हो, किसकी बेटी हो और तुम्हें पहले कभी ब्रज की गलियों में क्यों नहीं देखा?
2
काहेको हम ब्रजतन आवति खेलति रहति आपनी पौरी । सुनति रहति श्रवणनि नँद ढोटा करत रहत माखन दधि चोरी ॥
हम भला ब्रज की तरफ क्यों आएं, हम तो अपनी ही देहरी पर खेलते रहते हैं; बस अपने कानों से यह सुनते रहते हैं कि नंद का लड़का माखन और दही चुराता फिरता है।
3
तुम्हरो कहा चोरि हम लेहैं खेलन चलौ संग मिलि जोरी । सूरदास प्रभु रसिक सिरोमणि बातन भुरइ राधिका भोरी ॥
श्रीकृष्ण कहते हैं कि भला हम आपका क्या चुरा लेंगे, आओ साथ मिलकर जोड़ी बनाकर खेलने चलें। सूरदास कहते हैं कि रसिकों के शिरोमणि प्रभु ने अपनी मीठी बातों से भोली-भाली राधिका को बहला लिया।
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बूझत स्याम कौन तू गोरी | Sukhan AI