सीने में बुलहवस के भी था आबला मगर — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“The greedy one too bore a blister within his breast, yet hearing just the lancet's name, his face turned pale.”
अर्थ
बुलहवस (लालची) के सीने में भी छाला था, मगर नश्तर का नाम सुनते ही उसका मुँह पीला पड़ गया।
विस्तार
शायर यहाँ झूठे आशिक़ पर प्यार से तंज़ करता है। वह कहता है कि इस बुलहवस, यानी सतही और स्वार्थी आशिक़ के सीने में भी एक छाला था, किसी दर्द या चाहत का निशान। मगर जैसे ही उसने नश्तर का नाम सुना, वह तेज़ धार जो उस छाले को चीरकर खोल देती, उसका चेहरा डर से पीला पड़ गया। मतलब यह कि वह इश्क़ का दर्द महसूस करने का दिखावा तो कर सकता था, पर असली इम्तिहान, वह सच्ची तकलीफ़ जो सच्चे आशिक़ ख़ुशी से सहते हैं, उसे झेल नहीं सकता था। सच्चा प्रेमी उस धार का स्वागत करता है। दिखावे वाला उसके नाम से ही भाग खड़ा होता है।
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