क्या शैतान मारा एक सज्दे के न करने में — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

क्या शैतान मारा एक सज्दे के न करने में अगर लाखों बरस सज्दे में सर मारा तो क्या मारा

“What loss was Satan's in refusing once to bow his head? If for a million years he bowed, what would his bowing mean?”

— शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

अर्थ

एक सज्दा न करने से शैतान का क्या बिगड़ा? अगर वह लाखों बरस सज्दे में सिर झुकाए रहता तो भी इसका क्या महत्व होता?

विस्तार

यह शेर हमें रुककर सोचने पर मजबूर करता है कि असल में क्या मायने रखता है। शायर शैतान की कहानी की ओर इशारा करते हैं, जो सिर्फ़ एक बार सज्दा न करने के कारण बरबाद हो गया। शायर कहते हैं, ज़रा सोचो, वह एक घमंड कितना भारी था कि एक इनकार ने ऐसा पतन कर दिया। पर फिर गहरा सवाल उठता है। अगर कोई लाखों बरसों तक सज्दे में सिर झुकाए, मगर दिल के बिना, बिना सच्चाई के, तो उसने सच में क्या पाया? सिर्फ़ ऊपरी इबादत का कोई अर्थ नहीं। हमारे कामों के पीछे की भावना, भीतर की विनम्रता और सच्चाई ही उन्हें वज़न देती है। सच्ची भक्ति का एक पल खोखले दिखावों से कहीं ज़्यादा कीमती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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